Saturday, 22 August 2020

Ganpati Ki Sewa Mangal Mewa Ringtone, Aarti, MP3 Song and Lyrics in Hindi

Do you know which is the most favorite aarti and ringtone of Ganesh devotees?, Yes we know that so today we are going to tell you this. Ganpati is considered to be the first deity. With the remembrance of his name, he performs all the functions of life without any hurdles. Ganpati Ki Sewa Mangal Mewa (गणपति की सेवा मंगल मेवा)  song is the top in the fans' favorite list. To remove all the obstacles, Ganpati devotees is doing worship of Bappa as well as sing his aarti. The special thing is that in these days or festival time, ganpati ringtones based on Lord Ganesha were also very much discussed. So whenever you want to blessing of Lord ganpati, you can download and listen to the Ganpati Ki Seva Mangal Meva songs and Aarti which is based on Lord Ganesha.




Ringtone: Ganpati Ki Sewa Mangal Mewa Ringtone Free Download


Audio MP3 Aarti Song - Ganpati Ki Sewa Mangal Mewa


Full Mp4 Video Song - Ganpati Ki Sewa Mangal Mewa Aarti



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Ganpati Ki Seva Mangal Mewa Lyrics in Hindi


गणपति की सेवा मंगल मेवा, 
श्लोक & व्रकतुंड महाकाय, 
सूर्यकोटी समप्रभाः, 
निर्वघ्नं कुरु मे देव, 
सर्वकार्येषु सर्वदा। 

गणपति की सेवा मंगल मेवा, 
सेवा से सब विघ्न टरें, 
तीन लोक तैतिस देवता, 
द्वार खड़े तेरे अर्ज करे। 
रिद्धि सिद्धि संग विराजे, 
आनन्द सों चवर ढुरे, 
धूप दीप और लिए आरती, 
भक्त खड़े जयकार करे।। 

गुड़ के मोदक भोग लगत है,
मुषक वाहन चढ़ा सरे,
सौम्य सेवा गणपति की,
विध्न बाधा सब दूर करे,
भादों मास शुक्ल चतुर्थी,
भंडारे भरपूर भरे,
लियो जन्म गणपति ने,
दुर्गा मन आनन्द भरें।।

शिव शंकर के आनन्द उपज्यो,
नाम सुमर सब विघ्न टरें,
आन विधाता बैठे आसन,
इन्द्र अप्सरा नृत्य करें,
देख वेद ब्रह्माजी जाको,
विघ्न विनाशक नाम धरें,
पगथंभा सा उदर पुष्ट है,
देख चन्द्रमा हास्य करें।।

देकर श्राप चंद्रदेव को
कलाहीन तत्काल करें,
चौदह लोक मे फिरे गणपति,
तीनो लोक में राज करें,
उठ प्रभात जो करे आरती,
ताके सिर यश छत्र फिरे,
गणपति जी की पूजा पहले,
काम सभी निर्विघ्न करे।।

गणपति की सेवा मंगल मेवा,
सेवा से सब विघ्न टरें,
तीन लोक तैतिस देवता,
द्वार खड़े तेरे अर्ज करे।
रिद्धि सिद्धि संग विराजे,
आनन्द सों चवर ढुरे,
धूप दीप और लिए आरती,
भक्त खड़े जयकार करे।।
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